ऊँ सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी। आर्या दुर्गा जया आद्या त्रिनेत्रा शूलधारिणी ।। पिनकधारिणी चित्रा चन्डघण्टा महातपाः मनोबुद्विरहंकारा चित्त रूपा चिता चिति: सर्वमन्त्रमयी सत्या सत्यानन्दस्वरूपिणी अनन्ता भवानी भव्या भव्याभव्या सदागति : शाम्भवी देवमाता चिन्ता रत्नपप्रिया सदा सर्वाविद्या दक्षकन्या दक्षयज्ञ विनाशिनि अपर्णानेकवर्णा पाटला पाटलावती पट्टाम्बरप्रिधाणा कलमंजीररंजनी अमेयविक्रमा क्रूर सुन्दरी सुरसुन्दरी वनदुर्गा मातगडी मतगड: मुनिपूजिता ब्राह्मी माहेश्वरी चैन्द्री कौमारी वैष्णवीं तथा चामुण्डा चैव वाराही लक्ष्मीश्च पुरुषाकृति विमलोत्कर्षिणी ज्ञाना क्रिया नित्या बुद्धिदा बहुला बहुलप्रेमा सर्व वाहनवाहना निशुम्भशुम्भहन्नी महिषासुरमर्दिनी मधुकैटभहन्त्री चण्डमुण्डविनाशिनि सर्वासुरविनाशा सर्वदानवघातिनि सर्वशास्त्रमयी सत्या सर्वास्त्रधारिणी अनेकशस्त्रहस्ता च अनेकास्त्रस्य धारिणि कुमारी चैक कन्या च कैशोरी युवती यति: अप्रौढा चैव प्रौढ़ा च वृद्ध माता बलप्रदा महोदरी मुक्तकेशी घोररूपा महाबला अग्निज्वाला रौद्रमुखी कालरात्रिस्तपस्विनी नारायणी भद्रकाली विष्णुमाया जलोदरी शिवदूती कराली च अनन्ता परमेश्वरी कात्यायनी च सावित्री प्रत्यक्षा ब्रह्मवादिनी |
तारीख तिथि समय तक
श्री दुर्गा जी की विशेष पूजा प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्रि में की जाती हैं l चैत्र नवरात्रि शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती हैं और आश्विन माह से प्रतिपदा तिथि से को नवरात्रि का प्रारंभ होती हैं l।
श्री दुर्गा जी की पूजा अर्चना स्नान आदि से शुद्ध होकर शुद्ध और साफ सुथरे वस्त्र धारण करके प्रारम्भ की जाती हैं l श्री दुर्गा जी की मूर्ति की स्थापना करनी चाहिए l श्री दुर्गा जी की मूर्ति के दाहिनी ओर कलश स्थापना करनी चाहिए और कलश के नीचे जौ बीज रोपण करना चाहिए l कलश ठीक सामने जौ बीज रोपण करना चाहिए l श्री दुर्गा जी के सामने घी दीपक प्रवज्जलित करना चाहिए l श्री गणेश जी की मूर्ति पूजा करनी चाहिए l सभी देवी और देवताओं और मां दुर्गा जी आराधन करनी चाहिए l
श्री दुर्गा जी पूजा सामग्री :- जल , गंगा जल , पंचामृत , दूध , दही , घी , शहद , शर्करा , रेशमी वस्त्र , उप वस्त्र , नारियल , रोली , मौली , चन्दन , अक्षत , पुष्पमाला , धूप , दीप , नैवेद्य , फल , सुपारी , पान , लौंग , इलायची , श्रद्धा समान धन और आरती के घी दीपक आदि l
श्री दुर्गा सप्तशती चंडी पाठ करना चाहिए l प्रथम श्री दुर्गा जी कवच का पाठ करें l फिर अर्गला स्तोत्र और क्लीक स्तोत्र का पाठ करें l श्री दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय हैं l यदि आप सभी तेरह अध्यायों का पाठ करने में असमर्थ हो तो श्री दुर्गा सप्तशती में भगवती के तीन चरित्रों का पाठ करें l प्रथम चरित्र में प्रथम अध्याय का पाठ करें l दूसरे दिन दूसरे, तीसरे और चौथे अध्याय का पूर्ण पाठ करें l श्री दुर्गा जी तीसरा चरित्र का अध्याय 5 से 13 अध्यायों को पाठ करें l क्षमा याचना, सिद्ध कुंजी स्तोत्र, मां दुर्गा जी बत्तीस नाम वाली, और मां दुर्गा जी 108 नाम का जाप अवश्य करें l


No comments:
Post a Comment